
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सागौन तस्करी का मामला तूल पकड़ने के बाद वन विभाग आखिरकार हरकत में आ गया है। मरवाही वनमंडल के गौरेला रेंज अंतर्गत पंडरीपानी बीट में हजारों सागौन पेड़ों की अवैध कटाई उजागर होने के बाद डीएफओ, एसडीओ, उड़नदस्ता टीम और भारी संख्या में वन अमला मौके पर पहुंचा। जंगल में फैले ठूंठ और उजड़े प्लांटेशन को देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए।
जानकारी के मुताबिक, करीब 102 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले सागौन प्लांटेशन में 1000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई किए जाने की आशंका है। कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने आसपास के गांवों में दबिश दी, जहां कई घरों से बड़ी मात्रा में सागौन लकड़ी बरामद की गई। इतना ही नहीं, तस्करों ने कटे हुए सागौन के लट्ठों को तालाबनुमा डबरी में छिपाकर रखा था, जिसे निकालने के लिए टीम को विशेष अभियान चलाना पड़ा।
वन विभाग की टीम ने मौके पर लकड़ियों की गिनती, पंचनामा और जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध कटाई में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। विभाग अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े आरा मिल संचालकों, फर्नीचर कारोबारियों और लकड़ी खरीदारों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से जंगलों में हो रही कटाई की शिकायत करते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यही वजह है कि तस्करों के हौसले इतने बढ़ गए कि पूरे प्लांटेशन को उजाड़ दिया गया।
डीएफओ ने प्रथम दृष्टया विभागीय लापरवाही स्वीकार करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ निचले कर्मचारियों तक सीमित रहेगी, या फिर इस पूरे मामले में जिम्मेदार बड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। जिले में यह मामला अब वन संरक्षण और विभागीय जवाबदेही दोनों पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है।









